प्रदेश के सरकारी विभागों में लचर व्यवस्था की एक बानगी राजस्व परिषद में खड़ी मोटर साइकिलें हैं। सरकार द्वारा इन मोटर साइकिलों को राज्य के पर्वतीय जनपदों के लिए दी गई थीं। ताकि राजस्व विभाग के पटवारी अपने कामों में तेजी ला सकें और पहाड़ों में जनता की समस्या का त्वरित निस्तारण हो सके। लेकिन धामी सरकार की इस मंशा पर पानी फेरने का काम राजस्व परिषद कर रहा है। लगभग एक महीने से धूल खा रही मोटर साइकिलों को अभी तक पटवारियों को सौंपा नहीं जा सका है, जिससे समझा जा सकता है कि राजस्व विभाग पर लापरवाही और लेटलतीफी कितनी हावी है।
दरअसल, हीरो मोटोकॉर्प लि. द्वारा राजस्व विभाग को 320 मोटर साइकिलें दी गई थी। वहीं 27 जनवरी को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सभी बाइक को हरी झंडी दिखाकर रवाना भी किया था। लेकिन आज 1 महीने का समय पूरा होने जा रहा है और अभी तक इन बाइक को पटवारियों तक नही पहुंचाया गया है। इतना ही नहीं राजस्व विभाग में यह बाइकें धूल खा रही हैं। आलम यह है कि कई बाइकें यहां खड़े-खड़े खराब होने की कगार पर हैं, हालांकि राजस्व विभाग के आयुक्त चंद्रेश यादव के अनुसार आधी मोटर साइकिलें पटवारियों को दी जा चुकी हैं। आयुक्त चंद्रेश यादव ने बताया कि रजिस्ट्रेशन और बाकी कार्यवाही पूरी करने के बाद जनपदों के लिए बाइकों को रिलीज किया जा रहा है। राज्य में 13 जनपदों में से 11 जनपद पहाड़ी होने के कारण बाइकों को धीरे-धीरे डिस्ट्राब्यूट किया जा रहा है। वहीं उन्होंने बताया कि पटवारियों को बाइक ले जाने के भी निर्देश दिए गए हैं।
जन समस्याओं के निदान और विभिन्न कार्यों के लिए क्षेत्रों में भ्रमण के साथ ही कार्यों को शीघ्रता से करने में सुविधा तो दूसरी ओर जन समस्याओं का समाधान भी तेजी से होने की उम्मीद के साथ पटवारियों को मोटर साइकिलों देने का फैसला राज्य सरकार ने किया था। लेकिन, जिन बाइकों को पटवारियों के कामों में तेजी लाने और काम का बोझ हलका करने के लिए सौंपा जाना था, वो बाइकें एक महीने से राजस्व परिषद में खड़ी धूल खा रही हैं। वहीं राजस्व विभाग अपनी लेटलतीफी को पटवारियों पर थोपने का काम कर रहा है। आयुक्त ने परिषद में खड़े वाहनों को ले जाने के निर्देश तो दे दिए गए हैं लेकिन सवाल ये है कि दूर दराज के पहाड़ी जिलों से पटवारी अपने काम को छोड़कर आखिर बाइक लेने कैसे आएंगे।